Nirankar dev sewak biography of rory
The janam-sakhis as sources for the life of Guriti Nanak 2..
October, , specifying the names of recognised.
संस्मरण: बाल-मन का चितेरा कवि
सुधीर विद्यार्थी
सेवक जी की प्रारंभिक कविताओं का परिचय 1943 में उनके साहित्य भवन लिमिटेड प्रयाग से छपे संकलन ‘चिनगारी’ से मिलता है, जहां एक विद्रोही रचनाकार के रूप में उनकी सशक्त उपस्थिति दिखाई देती है। इस पुस्तक की भूमिका लिखी थी पुरुषोत्तम दास टंडन ने, जो उस समय साहित्य भवन लि.
प्रयाग के मंत्री थे। उन्होंने कहा भी था कि सेवक जी इन कविताओं की पंक्ति-पंक्ति में हमारा वास्तविक और दयनीय समाज कराह रहा है, और वास्तविकता का दिमागी ऐयाशी या कृत्रिमता से क्या संबंध!
जब मैंने बच्चों को स्वतंत्रता-संग्राम के पाठ पढ़ाए जाने की जरूरत पर बल दिया तो उनका उत्तर था कि ‘हमारे देश में तरह-तरह की वेशभूषा, रहन-सहन, आदतों, कलाओं और कार्य-कलापों वाले मनुष्य रहते हैं। उनसे परिचित करा कर हम बच्चों को देश का बोध करा सकते हैं। अपनी सामाजिक परिस्थितियों को बदलने के लिए लोगों ने कैसे-कैसे संघर्ष किए, उन्हीं में से एक स्वतंत्रता संग्राम भी था, जिसे यथार्थ रूप से प्रस्तुत करके बच्चों में समाज का निर्माता होने का विश्वास पैदा किया जा सकता है।’ 1950 में एक बार बरेली के प्रमु